Thursday, 5 May 2016

dharey banay rkhna

जब संसार वाले अपने सांसारिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए धैर्य के   ऐसे ऊँचे पैमाने खड़े कर सकते हैं , फिर हम सद्गुरु के भक्त होकर अपनी ईश्वरीय मंजिल तक पहुँचने के लिए सब्र का पुल क्यों नहीं बाँध सकते /इसलिए लक्ष्य को पाने का जुनून जगाए रखना /अपना धैर्य बनाए रखना / जैसे रोम एक दिन में नहीं बन गया था ,वैसे ही जीवन में कुछ करने की और खुद को कुछ बनाने की चाहत भी एक दिन में पूरी नहीं होती चाह को धैर्य की राह पर चलना आवश्यक हैं /और जहाँ लक्ष्य के प्रति चाह हो ,साथ ही साथ धैर्य की राह हो -वहाँ हार हो जाए -ऐसा कैसे संभव हैं ?
आज इंसान ऐसा नहीं सोचता वो सोचता हैं अगर हम आज इस्कूल में  दाखिला लेते और कल ही डॉक्टर या इंजीनियर बन जाते । आज बीज बोते और कल ही खेतों में फसल लहलहाने लगती /



 

No comments:

Post a Comment