बेटी किस घर को अपना घर कहे जिस घर में उसने जन्म लिया बह या जिस घर में शादी के बाद गई बह क्योंकि उसका तो कही भी कोई हक़ नहीं रहता है मयका जिस घर में जन्म लेती है पठती, लिखती, खेलती, है बही एक दिन उसके लिया पराया हो जाता है और माँ कहती है आज से पराई हो गई शादी के बाद माँ बाप के लिए बेटी पराई हो जाती है और जब ससुराल जाती है तो सास ससुर कहते है की पराये घर से आई है तो फिर बेटी का कौन सा घर हुआ ये कैसे रिस्तों मे हमारी जिंदगी उलझ गई है क्या बास्तब में बेटी का कोई घर नहीं होता बेटी सारा जीवन सबकी सुनती है लेकिन आज के नया ज़माने ने सब कुछ बदल दिया माँ- बाप, भाई -बहन, रिस्ते नाते बेटी- बेटा, सिर्फ व्यकित पैसों में सिमट कर रह गया आज उसे किसी रिस्ते की जरुरत नहीं अगर पैसे है तो सब कुछ है लेकिन मै ऐसा नहीं सोचती हूं मेरे लिए घर परिबार जयदा जरुरी है क्योंकि इनके बिना हम अधूरे है /