Thursday, 5 May 2016

dharey banay rkhna

जब संसार वाले अपने सांसारिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए धैर्य के   ऐसे ऊँचे पैमाने खड़े कर सकते हैं , फिर हम सद्गुरु के भक्त होकर अपनी ईश्वरीय मंजिल तक पहुँचने के लिए सब्र का पुल क्यों नहीं बाँध सकते /इसलिए लक्ष्य को पाने का जुनून जगाए रखना /अपना धैर्य बनाए रखना / जैसे रोम एक दिन में नहीं बन गया था ,वैसे ही जीवन में कुछ करने की और खुद को कुछ बनाने की चाहत भी एक दिन में पूरी नहीं होती चाह को धैर्य की राह पर चलना आवश्यक हैं /और जहाँ लक्ष्य के प्रति चाह हो ,साथ ही साथ धैर्य की राह हो -वहाँ हार हो जाए -ऐसा कैसे संभव हैं ?
आज इंसान ऐसा नहीं सोचता वो सोचता हैं अगर हम आज इस्कूल में  दाखिला लेते और कल ही डॉक्टर या इंजीनियर बन जाते । आज बीज बोते और कल ही खेतों में फसल लहलहाने लगती /

Saturday, 23 April 2016

बेटी का घर कौन सा है?

बेटी किस घर को अपना घर कहे जिस घर में  उसने जन्म लिया बह  या जिस घर में  शादी के बाद गई बह क्योंकि उसका तो कही भी कोई हक़ नहीं रहता है मयका जिस घर में  जन्म लेती है पठती, लिखती, खेलती, है बही एक दिन उसके लिया पराया हो जाता है और माँ कहती है आज से पराई हो गई शादी के बाद माँ बाप के लिए बेटी पराई हो जाती है और जब ससुराल जाती है तो सास ससुर कहते है की पराये घर से आई है तो फिर बेटी का कौन  सा घर हुआ ये कैसे रिस्तों मे  हमारी  जिंदगी उलझ गई है क्या बास्तब में  बेटी का कोई घर नहीं होता बेटी सारा जीवन सबकी सुनती है लेकिन आज के  नया ज़माने ने सब कुछ बदल दिया माँ- बाप, भाई -बहन, रिस्ते नाते बेटी- बेटा, सिर्फ व्यकित पैसों में  सिमट  कर रह गया आज उसे किसी रिस्ते की जरुरत नहीं अगर पैसे है तो सब कुछ है लेकिन मै ऐसा नहीं सोचती हूं मेरे लिए घर परिबार जयदा जरुरी है क्योंकि इनके बिना हम अधूरे  है /

 

 

Friday, 14 November 2014

 happy children day

कल का दिन किसने देखा, आज का दिन हम खोए क्यो,

जिन घड़ियों मैं हँस सकते है, उन घड़ियों मैं रोएँ क्यों.